Budget 2026 से पहले टेलीकॉम इंडस्ट्री का बड़ा दबाव, COAI ने मांगी लाइसेंस फीस कटौती और GST राहत
भारत में Union Budget 2026 से पहले टेलीकॉम इंडस्ट्री ने सरकार के सामने अपनी सबसे बड़ी आर्थिक मांगें रख दी हैं। 13 जनवरी 2026 को सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों की प्रमुख इंडस्ट्री बॉडी COAI (Cellular Operators Association of India) ने सरकार से लाइसेंस फीस कम करने और GST नियमों में राहत देने की मांग की है।
यह कदम ऐसे समय पर आया है जब 5G नेटवर्क के विस्तार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कंपनियों को भारी निवेश करना पड़ रहा है।
COAI ने क्या मांग की?
COAI ने बजट से पहले सरकार को दिए सुझावों में कहा कि मौजूदा लाइसेंस फीस और अन्य नियामकीय भुगतान टेलीकॉम सेक्टर पर बड़ा दबाव डाल रहे हैं।
मुख्य मांगें
- लाइसेंस फीस को 3% से घटाकर 0.5%–1% करने का प्रस्ताव
- Digital Bharat Nidhi (DBN) योगदान को लेकर अस्थायी रोक का सुझाव
- रेग्युलेटरी पेमेंट्स पर GST राहत और ITC समस्या का समाधान
COAI का तर्क है कि इतनी बड़ी लेवी के साथ कंपनियों के लिए नेटवर्क विस्तार और नई टेक्नोलॉजी में निवेश करना मुश्किल हो जाता है।
लाइसेंस फीस पर “0.5%–1%” का प्रस्ताव क्यों अहम है?
भारत में टेलीकॉम लाइसेंस फीस AGR (Adjusted Gross Revenue) पर आधारित होती है। COAI का कहना है कि:
- यह राशि कंपनियों की कैश फ्लो क्षमता घटाती है
- नेटवर्क अपग्रेड, टावर, फाइबर और 5G रोलआउट पर असर डालती है
- ग्रामीण विस्तार और क्वालिटी सुधार की रफ्तार धीमी हो सकती है
इसीलिए COAI ने सुझाव दिया कि 0.5%–1% की फीस सरकार के प्रशासनिक खर्च को कवर करने के लिए पर्याप्त है।
GST और ITC (Input Tax Credit) का मुद्दा क्या है?
COAI ने GST को लेकर एक बड़ा मुद्दा उठाया—इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का “pile-up” यानी जमा होते जाना।
उनका कहना है कि टेलीकॉम कंपनियों को कई ऐसे भुगतान करने पड़ते हैं जिनपर GST लागू होता है, लेकिन ITC का उपयोग हर बार प्रभावी तरीके से नहीं हो पाता, जिससे:
- कंपनियों के पास नकदी फंसती है
- वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ता है
- निवेश क्षमता प्रभावित होती है
Digital Bharat Nidhi पर COAI का स्टैंड
रिपोर्ट के मुताबिक COAI ने यह भी कहा कि Digital Bharat Nidhi में पहले से अनयूज्ड कॉर्पस मौजूद है। इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि:
- जब तक मौजूदा फंड उपयोग न हो जाए, आगे योगदान रोका जाए
- इससे सेक्टर पर तात्कालिक वित्तीय दबाव कम होगा
सरकार के लिए यह मुद्दा क्यों संवेदनशील है?
टेलीकॉम सेक्टर देश का डिजिटल आधार है, लेकिन सरकार के लिए नियामकीय शुल्क और GST राजस्व स्रोत भी हैं।
ऐसे में बजट 2026 में संतुलन बनाना चुनौती होगी:
- एक तरफ कंपनियों को राहत देकर 5G/6G जैसे भविष्य के नेटवर्क तेज करने की जरूरत
- दूसरी तरफ सरकारी राजस्व का प्रबंधन
यूजर्स पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर सरकार COAI की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो भविष्य में:
- नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ सकता है
- ग्रामीण 4G/5G कवरेज में सुधार हो सकता है
- सेवा गुणवत्ता बेहतर होने की संभावना
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हालांकि, यह जरूरी नहीं कि इससे टैरिफ तुरंत कम हो जाएं, क्योंकि कंपनियों की निवेश जरूरतें भी बहुत बड़ी हैं।
निष्कर्ष
13 जनवरी 2026 को COAI की यह मांगें टेलीकॉम इंडस्ट्री के बढ़ते वित्तीय दबाव को उजागर करती हैं। अब निगाहें इस पर हैं कि Budget 2026 में सरकार टेलीकॉम सेक्टर को कितना समर्थन और राहत देती है, क्योंकि इसका असर सीधे डिजिटल इंडिया की गति और नेटवर्क क्वालिटी दोनों पर पड़ेगा।
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