TRAI चेयरमैन का विजन: "सिर्फ नेटवर्क नहीं, AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा भारत की ताकत"
दिनांक: 13 जनवरी 2026 – भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने आज टेलीकॉम और टेक्नोलॉजी जगत को एक नई दिशा दिखाई है। 13 जनवरी को आयोजित एक नैसकॉम (Nasscom) प्री-समिट इवेंट को संबोधित करते हुए, उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेलीकॉम नेटवर्क के गहरे संबंध पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
AI का लोकतंत्रीकरण (Democratization of AI)
श्री लाहोटी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि AI का लाभ केवल कुछ बड़ी कंपनियों या शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। 13 जनवरी 2026 को दिए गए उनके बयान के अनुसार:
"AI इंफ्रास्ट्रक्चर का डिजाइन और रोलआउट यह तय करेगा कि तकनीक का लाभ चंद हाथों में सिमट कर रह जाएगा या फिर यह विभिन्न क्षेत्रों और सेक्टर्स में समान रूप से वितरित होगा।"
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में टेलीकॉम कंपनियां (Jio, Airtel) तेजी से अपने नेटवर्क्स में AI का एकीकरण कर रही हैं।
टेलीकॉम नेटवर्क: AI की रीढ़
TRAI प्रमुख ने जोर देकर कहा कि भारत का टेलीकॉम नेटवर्क देश के AI इकोसिस्टम के केंद्र में होगा। भविष्य में:
- Edge Computing: डेटा को प्रोसेस करने के लिए बड़े डेटा सेंटर्स के बजाय नेटवर्क के किनारे (Edge) पर प्रोसेसिंग होगी, जिसके लिए मजबूत टेलीकॉम नेटवर्क की जरूरत होगी।
- रियल-टाइम निर्णय: सेल्फ-ड्राइविंग कारों से लेकर स्मार्ट सिटीज तक, सब कुछ लो-लेटेंसी (Low Latency) नेटवर्क पर निर्भर करेगा, जिसे AI ही मैनेज कर सकता है।
- नेटवर्क सेल्फ-हीलिंग: AI की मदद से टेलीकॉम नेटवर्क खुद अपनी खामियों को पहचानकर उन्हें ठीक (Self-repair) कर सकेंगे।
आत्म-नियमन (Self-Regulation) की वकालत
13 जनवरी के इस कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण बिंदु 'रेगुलेशन' यानी नियमन का था। TRAI चेयरमैन ने कहा कि टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है कि हर चीज के लिए कानून बनाना मुश्किल है। इसलिए, इंडस्ट्री को "मजबूत आत्म-नियमन" (Strong Self-Regulation) की ओर बढ़ना चाहिए।
इसका मतलब है कि टेलीकॉम और टेक कंपनियों को खुद ही नैतिक जिम्मेदारी लेनी होगी कि वे AI का उपयोग सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से करें, बिना सरकार के डंडे का इंतजार किए।
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उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
नैसकॉम इवेंट में मौजूद टेक लीडर्स और टेलीकॉम विशेषज्ञों ने TRAI चेयरमैन के विजन का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 वह साल होगा जब टेलीकॉम कंपनियां केवल 'डेटा पाइप' नहीं रहेंगी, बल्कि 'AI प्लेटफॉर्म' बन जाएंगी।
चुनौतियां और अवसर
चेयरमैन ने यह भी माना कि इसके लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी। 5G की सफलता के बाद, अब फोकस AI-Ready नेटवर्क बनाने पर है। इसमें:
- मैसिव MIMO तकनीक का विस्तार।
- क्लाउड-नेटिव आर्किटेक्चर को अपनाना।
- ग्रीन टेलीकॉम (ऊर्जा की बचत) पर ध्यान देना शामिल है।
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निष्कर्ष
13 जनवरी 2026 को अनिल कुमार लाहोटी का यह संबोधन केवल एक भाषण नहीं, बल्कि भारतीय टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक रोडमैप है। यह साफ दर्शाता है कि TRAI अब केवल कॉल रेट्स या स्पेक्ट्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत को एक 'AI-First Nation' बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से सोच रहा है।
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